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वे नीम-शब नज़रें



वे नीम-शब नज़रें जब उठीं फ़लक की ओर
फैला दिया उफ़क ने सितारों के जाल को |

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बह गयी थी इक दिन तन्हाई भी जज़्बात में,
चश्म-ए-नम से कुछ बूँदें गिर पड़ीं बरसात में |
बरखा में मिली वे बूँदें यूँ असर कर गयीं
जहाँ भी गिरी शाख पर, वे फूल बन गयीं |

_____हिमांशु

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