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देख तुम्हें सुख पाए कोई,,,,





 
अब न गगन में भीगे तारे
अब न नयन में आंसू खारे
रोती रात बिदा होती है
जिस में तनिक न बिरहन सोई
देख तुम्हें सुख पाए कोई |
खिली मालती ले उजियाली
हरसिंगार की डाली-डाली
झूम रही पहली बयार में
अपनी ही छबि में जो खोई
देख
तुम्हें सुख पाए कोई |

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