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वे फुर्सतों के ज़माने,,,

ज़िंदगी की डगर पे 
पहुंचे किस मुहाने,,,
दूSSSर कहीं छूटे
वे फुर्सतों के ज़माने,,,


ज़िंदगी की डगर पे
तारों की छैयां औ'
प्रीत के तराने,,,
दोस्तों के किस्से,
वे प्यारे अफ़साने,,,
सावन के झूले औ'
झील के किनारे,,,
झूमती बयार औ'
मचलते इशारे,,,
धड़कते वो अरमाँ,
हसीन प्यारे-प्यारे,
नींद में बरसते
वो ख्वाब ढेर सारे,,,
जुम्बिश-ए-ज़िंदगी में
बदले साँझ-सकारे,
फिर भी सुकूँ है दिल को
ये सब हैं मेरे सहारे ||
_____हिमांशु

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