-->

गुज़रा वक़्त ,,,,,


यूँ तो आज से भी कोई शिकायत नहीं मुझको,
लेकिन गुज़रा वक़्त अक्सर याद आ जाता है |

खुद तो बेमुर्रवत जाने कहाँ गए वो मंज़र,
ख़्वाबों में दास्तानें न जाने क्यूँ भेज देते हैं ?

कितनी शिद्दत है बचपन की हसीन यादों में,
आँखों में दर्द का इक सैलाब-सा भेज देती हैं |

वक़्त के साथ देखिये कितना कुछ बदल गया है
आईना भी बेतक़ल्लुफ़ ज़रा कम ही मुस्कुराता है |

___हिमांशु

Nemo enim ipsam voluptatem quia voluptas sit aspernatur aut odit aut fugit, sed quia consequuntur magni dolores eos qui ratione voluptatem sequi nesciunt.

Disqus Comments